Wednesday, November 5, 2014

79. Megh and Med: मेघ और मेद

know your history की पोस्ट में मैंने अजमेर (राजस्थान) के सन्दर्भ में मेघ और मेद शब्द के बारे में पुरातत्व वेत्ताओं की एक टिपण्णी उल्लेखित की थी, जिसमें यह बताया गया था कि पहले के इतिहासकारों ने मेद की साम्यता मेर से करली थी। जो गलत है एवं उस पुरातत्व वेत्ता ने उसे दुरुस्त करते हुए लिखा कि मेद ही आगे जाकर मेग शब्द में बोला जाने लगा। आदि-आदि।
यहाँ इसके बारे में आपके विचारार्थ कुछ घटनाएँ रख रहा हूँ, जिस पर आप विचार करके मिथकीय इतिहास से बाहर निकल कर अपना सच्चा इतिहास खोज सकते हो और लिख सकते हो। मैं जो लिख रहा हूँ वह अंतिम नहीं है बल्कि इस दिशा में शुरुआत मात्र है। जिसमें खोज और संशोधन की पूरी गुंजाईश है।
महाभारत में मद्र जाति का जिक्र है। मनु ने भी मद्र का उल्लेख मेद के रूप में बहुवचन में मेदा किया है। महाभारत और मनु के वर्णन में मदों की बस्तियों का उल्लेख जिन जगहों पर किया है वहां कम या ज्यादा आज भी मेघ निवास करते हैं। स्पष्ट यह है कि आज के मेघों का पूर्वगामी संबोधनार्थ शब्द मेद ही था। मेद से मेग होना भाषा और बोली के लिहाज से कतई अस्वीकार्य नहीं है। यही मेग या मेद यूनानी में मेक, अफगानी में मेद, पर्शियन में मेज, इराक/ईरान, उक्रेन, आदि में मेज आदि आदि कई रूपों में लिखा गया। उनके अनुवादकर्ताओं ने अपनी वर्तनी के अनुसार और भी अन्य तरह से विखंडित किया। कुल मिलाकर मेदों से सम्बंधित प्राचीन इतिहास मेघों का ही है। इस बात पर मेघों को ध्यान देना चाहिए और खोज करनी चाहिए।
भारत या सिंध पर एलेग्जेंडर (सिकंदर) के आक्रमण के समय उसका मुकाबला मेघों से हुआ था। इसका उल्लेख मैने कन्निंघम महोदय के हवाले KYH की पोस्ट में किया था। अब यहाँ अरबी लेखकों को टटोले तो ये सब तथ्य मेल खाते हुए दिखते हैं। जिसको अलेक्षन्दर (सिकंदर) के इतिहासकारों ने मेक या मेकोइ आदि कहा उन्हें अरबी इतिहास कारों ने मेद कहा, जिसकी वर्त्तमान पहचान मेग या मेघ के रूप में है।
मुहम्मद बिन कासिम के आक्रमण के समय उसका कई जगह मुकाबला मेदों यानि मेघों से हुआ। मुज्मालू ए तवारीख में बताया गया है कि कासिम के समय सिन्धु नदी के किनारों पर मेदों और जाटों की बस्तियाँ थीं। जिनसे कासिम का या उनके कमांडरों का युद्ध हुआ। कई जगह हारे तो कई जगह हराया। जाट और मेघों के बीच लम्बे संघर्ष का भी वर्णन है। अंततः कासिम के सहयोग आदि से जाट टिक गए। मेघ दरबदर हुए आदि-आदि।
वहां मेघों की उत्पति हल के पुत्र नूह से बताई गयी है। हाल से हलन या हेलन जाति बनने का भी जिक्र है। मेघ लोग सत्ता विहीन होने पर चरवाहों जैसा जीवन में ढल गए आदि-आदि।
महाभारत के एक प्रसंग में इसी तरह का जिक्र मेदों के सम्बंध में आता है। बताया यह जाता है कि जर्टिका (जाट) और मेघों (मेदों) के बीच लडाई झगड़े में वह क्षेत्र राजा विहीन होने पर दुर्योधन ने अपनी बहन दस्सल को भेजा। जिसने वहां राज्य किया। कन्नौज के राजा जयद्रथ के मरने पर वह भी सती हो गयी आदि आदि।
इन सब कड़ियों की छानबीन और विश्लेषण आपके छुपे इतिहास को उजागर कर सकता है। महाभारत में भी मेघ जिसे मेद जाति कहा गया है हल के पुत्र नूह से पैदा होना बताया गया है। मैंने glossary ke sandarbh से एक पोस्ट में बताया था कि मेघ को नारायण का पुत्र कहा गया है। नारायण और नूह में क्या सम्बन्ध है? क्या नूह ही नारायण में परिवर्तित हो गया? उसे ऋषि contn..

अब उन लोगों के लिए जो धारू नामधारी एक सिद्ध पुरुष को ही मेघ रिख या मेघ ऋषि मानते है- यह सब क्योंकर विचारणीय नहीं बन पाता है? धारू मेघ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व है। जिसका समय निश्चित है। उसके समय के समकालीन लोगों का उसकी वाणियों और कथा- कीर्तन में उल्लेख है। जिसकी पुष्टि कई ऐतिहासिक साक्ष्यों से होती है। ज्यादा से ज्यादा उसका समय 14वीं/15वीं शताब्दी से पीछे नहीं धकेला जा सकता। और उस समय किसी भी प्रकार से मेघ ऋषि नहीं कहलाते थे। उस समय तक इस जाति की पदावनति हो चुकी थी। धारू मेघ खुद मालानी के क्षत्रप मालदे का हाली होता है। यह बात न केवल मेघों की वार्ताओं में बल्कि अन्य स्रोतों से सुस्पष्ट है। अतः उसकी आड़ लेकर भी ऋषि का मिथक नहीं गढ़ सकते।

See the comment of Sir Henry Elliot in the history of India's ,volume.1 - footnote at page-270-271--- He writes-
"It is said that there is a tribe called Mez, on the lower Indus, if so, that may be the proper reading of the text, by adding a diacritical point. They are doubtless the same as the Mand mentioned at p. 64, respecting whom Ibn Haukal observes : — " The infidels who inhabit Sind are called Bodha and Mand." If Med should be the correct reading of this latter passage (and a transposition of points is all that is required to make it so) we might be encouraged from the juxtaposition of the two names, to look upon them as descendants of the ancient Medes, for Herodotus observes that the Medes were divided into six clans, of which one was the Budii. {Clio, c. vii.) put them to great distress, which compelled them to take refuge on the other side of the river Pahan, hut being accustomed to the use of boats, they easily crossed and made a successful attack on the Meds, killed many of them, took several prisoners, and plundered their country. One of the Jat chiefs, seeing the sad state to which the Meds were reduced, made the people of his tribe understand that success was not constant; that there was a time when the Meds attacked the Jats, and harrassed them, and that the Jats had in their turn done the same. He impressed upon their minds the utility of both tribes living in peace, and then advised the Jats and Meds to send a few chiefs to wait on king Dajdshan, (Dar- yodhana) son of Dahrat, (Dhritarashtra) and beg of him to appoint a king over them who might govern them, and that good might result from it. After some discussion, his proposition was adopted, and the emperor Dajushan nominated his sister Dassal, wife of king Jandrat, a powerful prince, to rule over the Jats and Meds. Dassal went and took charge of the country and cities, the particulars of which and of the wisdom of the princess, are detailed in the original work. There was no Brahmin or wise man in the country who had attained to such a degree of wisdom as the queen. She therefore wrote a long letter to her brother for assistance, who collected 30,000 Brahmins from all Hindustan, and sent them, with their families and adherents, to his sister. There are several discussions and conversations about these Brahmins in the original work. From this time Sind became populous. The original work gives a description of the provinces, the rivers and wonders of the country, and mentions the foundation of cities. The city which the queen made the capital, is called Askaland.* A small portion of the country was made over to the Jats, and one of them was elected as their chief; his name was Judrat. Similar arrangements were also made for the Meds. This government continued for twenty wands of years, after which the Bharats lost possession of the country. ******page 270-271

Rattan Gottra My studies about 'Meghs' are similar to yours. Thank you for information. Major causes behind their defeats & subjugation by Aryans need to be probed, so that the Meghs may take lessons from the same for their benefit. A great work indeed.

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